कभी वक्त हमें न मिला
वक्त ने उन्हें भी मोहलत न दी
जद्दोजहद की कशमकश में
मिलने की हमें फुर्सत नहीं।
वक्त की पाबंदी उधर भी थी,
बंदिशें वक्त की इधर भी रहीं,
कई कोशिशें कीं मिलने की,
वक्त ने कभी इजाज़त न दी।
मसरूफ़ियतों में उलझे रहे हम सदा,
वक्त की फितरत सुलझी नहीं,
मिलने की तड़प उनकी भी थी,
आरज़ू-ए-मुलाक़ात हमारी भी।
न फ़रागत के लम्हे उन्हें मिले,
न फुर्सत की घड़ियाँ हमें नसीब हुईं,
कहने को एक ही गाँव के बाशिंदे हैं हम,
शहर में मुलाक़ात हो न सकी।
-देव सिंह
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