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ख़्वाबों की ताबीर मिल गई "शमीम",

                
                                                         
                            साथ तुम्हारे सफ़र सुहाना मिला,
                                                                 
                            
तुम को पाकर सारा ज़माना मिला।

गेसू-ए-सियाह-फाम के साए मिले,
ख़ूबसूरत दिलनशीं ठिकाना मिला।

मेरी हर दुआ क़बूल हो गई जैसे,
दिल में तुम्हारे आशियाना मिला।

मंज़िल-ए-मक़सूद मेरी तुम ही हो,
ख़ुशक़िस्मती शाना-ब-शाना मिला।

ज़िन्दगी बेमक़सद जी रहे थे हम,
तुम मिले जीने का बहाना मिला।

ख़्वाबों की ताबीर मिल गई "शमीम",
और बेशकीमती नज़राना मिला।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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5 घंटे पहले

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