किसी के वास्ते बद् दुआ न करो,
भला न कर सको तो बुरा न करो।
हमारा साथ देना गर गवारा नहीं तो,
मिलते रहने का सिलसिला न करो।
नहीं मुमकिन है गर निभा पाना तो,
हम से तुम वादा-ए-वफ़ा न करो।
वो राह जिसकी कोई मंज़िल नहीं,
तुम ऐसी राहगुज़र चला न करो।
दिल की हर आह असर करती है,
दिल किसी का भी दुखाया न करो।
हरेक मक़ाम से आगे और रास्ते हैं,
"शमीम" चलते जाना है रुका न करो।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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