आप से हम बड़ी हसरत से मिले,
जब मिले हम तो शिद्दत से मिले।
हाले-दिल हम समझ नहीं पाते,
जब मिले आप तो नुज़हत से मिले।
अरमाँ चाहत से तो बर नहीं आते,
उल्फ़त आप की इनायत से मिले।
आप का क़ुर्ब दिलनशीं है जैसे,
किसी गुलाब की निकहत से मिले।
बंदिशें हैं ज़मानेभर की बे-इंतहा,
हम मिले भी तो रवायत से मिले।
नसीब में नहीं है जो नहीं मिलता,
नसीब भी "शमीम" मेहनत से मिले।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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