आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिल ने धीरे से कहा, यही तो मेरा घर गया है।

                
                                                         
                            तुम मिले तो लगा, वक्त ठहर गया है,
                                                                 
                            
दिल ने धीरे से कहा, यही तो मेरा घर गया है।

तुम्हारी हँसी में मेरी सुबह है,
तुम्हारी बातों में मेरी शाम ढली है।

मैंने माँगा नहीं था कुछ खुदा से ज्यादा,
तुम मिले तो लगा, सब कुछ मिला है।

न चाहत है चाँद की, न सितारों की,
तुम पास हो तो रोशनी हजारों की।

रहना यहीं, इसी मोड़ पर,
मेरा दिल अटका है, तुम्हारी ओर पर।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर