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उठो जवानो, देश पुकारे, वक्त नहीं है सोने का

                
                                                         
                            तिरंगा बोलेगा
                                                                 
                            

उठो जवानो, देश पुकारे, वक्त नहीं है सोने का,
कसम है तुमको माटी की, नहीं झुकने देंगे इस कोने का।

लहू से लिखा है इतिहास, ये स्याही से नहीं लिखा,
भगत, आज़ाद, सुभाष ने, खुद को मिटाकर इसे गढ़ा।

15 अगस्त सिर्फ़ तारीख नहीं, एक जिम्मेदारी है,
आजादी मिली है मुफ्त में नहीं, ये बड़ी भारी पारी है।

क्या करोगे इस आजादी का, सोचो एक बार,
नौकरी, दौलत, शोहरत से बढ़कर भी है देश का प्यार।

तिरंगा हाथ में नहीं, दिल में लहराना है,
हर गली, हर खेत, हर स्कूल में इसे फहराना है।

भ्रष्टाचार, नफरत, आलस को अब भगाना है,
नया भारत खुद से ही, हम सबको बनाना है।

उठो, चलो, दौड़ो, रुकना अब मना है,
भारत को विश्वगुरु बनाना, यही अब सपना है।

जय हिंद!
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3 घंटे पहले

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