सिद्ध है जीवन उस मानव का
धैर्य, जिसका आधार बना।
धैर्य है शक्ति तुम्हारी,
विपत्तियों ने भी हिम्मत हारी।
सद्गुणों का सूरज जागेगा,
अवगुणों का अंधेरा भागेगा।
मन सागर सा हो जाएगा
जब धैर्य की शक्ति पाए।
पल-पल मन को हर्षाता है,
हर कार्य सफल हो जाता है
जो धैर्य को पा जाता है।
अंदर फैली ज्वाला क्रोध की
वह बुझ जाती है,
रिश्तों में जड़े प्रेम की
और बढ़ जाती हैं।
कितना करूँ मैं बखान इसका,
गुण ही है अमृत समान।
-देव गिरि
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