आओ चलो सो जायें अब, खो जायें कसमों वादों में
कुछ सुघड़ सलोने सपनों में, कुछ मीठी मीठी यादों में
कल की फिक्र करें क्यों नादां,आज तो जी भर जीलें हम
वह भी हसरत मिट जाने दो ,जो बाकी रही इरादों में
आओ चलो सो जायें,,,
इतना दूर चलेंगे चल, जहाँ कोई अब तक गया नहीं
नहीं खुद को भी ढूँढ सके हम ,उल्फत के उन्मादों में
आओ चलो सो जायें,,,,
चाहत को इबादत में बदलें, रूहों में बस जायें हम
रब हमको आकर ढूंढे, खुद ही अपने सज्जादों में
आओ चलो सो जायें,,,,
साया भी दूर अंधेरे में, न दुनिया की परवाह करें
मैं रहूँ दुआओं में तेरी, तू हो मेरी फरियादों में
आओ चलो सो जायें ,,,
कुछ सुघड़ सलोने सपनों में, कुछ मीठी मीठी यादों में
आओ चलो सो जायें अब, खो जायें कसमों वादों में
-देवेन्द्र सिंह चौहान
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