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तलाश क्यों नहीं

                
                                                         
                            तुम्हें वो पहले जैसी ,तलाश क्यों नहीं?
                                                                 
                            
वो चाहत वो तड़प और वो, प्यास क्यों नहीं?
तुम्हें,,,,
लम्हों की जुदाई में, आँखों में जल जले थे,
मुद्दतों से दूरियां हैं, बरसात क्यों नहीं ?
तुम्हें,,,
पलकों पे मेरी शबनम,न तुमको गवारा थी,
सावन बरस रहा है, तुम उदास क्यों नहीं?
तुम्हें,,,,
ख्वाबों में खयालों में, दिल में सजी हुई तुम,
तुम दूर भी नहीं हो, पर पास क्यों नहीं ?
तुम्हें,,,,
कभी मुस्कुराते न थे, मुझको वगैर देखे,
मैं हूँ वो ही तुम्हें वो, एहसास क्यों नहीं?
तुम्हें,,,,
जमाने की महफिलों में, तुम मुस्कुरा रही हो
फकत एक मैं ही, खास क्यों नहीं?
तुम्हें,,
महका रही है बेहद, खुशबू तुम्हारी पतझड़
फूलों मॆं इस चमन के, मिठास क्यों नहीं?
तुम्हें,,
वो चाहत,,,,
-देवेन्द्र सिंह चौहान
 
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47 मिनट पहले

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