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युद्ध के बाद

                
                                                         
                            युद्ध खत्म होगा
                                                                 
                            
फिर एक झूठी संवेदना व्यक्त करते हुए
राजनेता लोग
राजनीति में खो जाएंगे
वैज्ञानिक लोग
नई खोज में चल निकलेंगे
कवि लोग
कविताओं की दुनिया में लीन हो जाएंगे
और आंकड़ों में तब्दील हो जाएंगे
मारे गए सारे लोग
सब कुछ वैसा ही हो जाएगा
जैसा पहले था
यानी सब की गाड़ी पटरी पर चलने लगेगी
धीमी या रफ्तार से
किसान ट्रैक्टर लेकर
खेतों में चल निकलेंगे
मजदूर काम पर
समय पर खुलने लगेगा
नौकरशाहों और कामगारों के ऑफिस
धीरे-धीरे टेलीविजन से
संवेदनाओं के सारे शब्द छंट जायेंगे

बस बची रह जाएंगी वे विधवा स्त्रियां
जो हर शाम
अपने पति के इंतजार में
लेती रहेंगी सिसकियां
माएं बिलखते हुए
भूलने की कोशिश करेंगी
अपने प्यारे-दुलारे पुत्र की स्मृतियां
नन्हें शिशु पिता के इंतजार मे टकटकी लगाये रहेंगे
कई कई दिनों तक

और कुछ नहीं बदलेगा
युद्ध के बाद
-दीपक शर्मा
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5 महीने पहले

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