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प्रलय का स्रोत सदैव जल ही होगा

                
                                                         
                            प्रलय का स्रोत
                                                                 
                            

प्रलय का स्रोत सदैव जल ही होगा,
वो नदी में उफ़ान आए…
या आँखों में।

नदी का उफ़ान
किनारे मिटाता है,
और आँखों का पानी
अक्सर रिश्तों की
हदें।

कुछ बाढ़ें
शहर डुबोती हैं,
कुछ आँसू
इंसान के भीतर
एक पूरी दुनिया।

हर आँसू कमज़ोरी नहीं होता—
कभी-कभी
वो उन तूफ़ानों की आवाज़ होता है,
जिन्हें इंसान
बरसों से
ख़ामोशी में सहता आया है।

इसलिए
किसी की आँखों में ठहरे पानी को
सिर्फ़ आँसू मत समझना…

हो सकता है,
वहाँ कोई समंदर
अपना किनारा खो चुका हो।

क्योंकि प्रलय का स्रोत सदैव जल ही होगा—
वो नदी में उफ़ान आए…
या आँखों में।
-दीपक शर्मा ‘दीप’
 
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49 मिनट पहले

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