हवाओं में हमेशा अब तेरा पैग़ाम रहता है,
जुबाँ पर हर घड़ी बस एक तेरा नाम रहता है।
नज़र से दूर रहकर भी जो दिल के पास रहता है,
तेरी यादों का वो क़िस्सा सुबह-ओ-शाम रहता है।
ये मीलों के कभी फ़ासले कम हो नहीं सकते,
मोहब्बत करने वालों का जुदा मक़ाम रहता है।
छुपाने से नहीं छुपती कभी यह इश्क़ की ख़ुशबू,
तेरी चाहत का अब हर ज़िक्र सरे-आम रहता है।
जुदा होकर भी हम दोनों जुदा हो ही नहीं पाते,
वफ़ा की राह में चाहत का यह अंजाम रहता है।
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