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तेरी खूबसूरती के नाम 

                
                                                         
                            इस नीले आसमान की चादर को मैं तो उसकी ओढ़नी कहूँगा,
                                                                 
                            
और चमकते हुए इन तारों को मैं उसकी मुस्कान की रोशनी कहूँगा। 

इस सर्दी की ठंडी सुबह की धूप को मैं उसकी आहट कहूँगा,
और बाग में खिले उस गुलाब को मैं उसकी सादगी की चाहत कहूँगा। 

इस बहती हुई ठंडी हवा को मैं उसकी जुल्फ़ें कहूँगा,
और समंदर की उन शांत लहरों को मैं उसकी निगाहें कहूँगा। 

इस घटा को मैं तो उसकी आँखों का काजल कहूँगा,
और चाँद की इस खूबसूरत रोशनी को मैं उसका आँचल कहूँगा।
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3 hours ago

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