थैलों का प्रचलित यह रूप,
प्लास्टिक है अक्षय प्रदूषक अनूप।
पर्यावरण-विरोधी, अनुपयुक्त,
फिर भी होता यह अतिप्रयुक्त।।
प्रदूषकों में मात्रा अत्यधिक,
प्रदूषण का दूसरा नाम प्लास्टिक।
कचरों में इसका सर्वाधिक अंश,
दे रहा प्रकृति को गहरा दंश।।
रंगीन प्लास्टिकों का प्रयोग,
लाता है कैंसर-जनित रोग।
भूगर्भीय जल इससे बाधित,
मूक जीवों का हो रहा अहित।।
कूड़ेदान भी दिखे निस्सहाय,
रोके बहाव, घुस जलनिकाय।
नदियों का प्रदूषित करे जल,
समुद्री जीवों के लिए बना गरल।
प्लास्टिक कचरे से निजात
पुनर्प्रयोग से ही हो सकता प्राप्त।
प्लास्टिक-नियमन के कई नियम,
ज़रूरत है, जगें आप और हम।
पर्यावरण-अनुकूल सामग्री प्रतिस्थापन,
सीमित हो इसका प्रयोग, उत्पादन।
प्रकृति-प्रेम का यह प्यारा टैग,
जैवनिम्नीकृत (बायोडेग्रडेबल) हैं पेपर बैग।
सहज विघटनीय और प्रदूषण-मुक्त,
पर्यावरण हेतु यही हैं उपयुक्त।
आओ मिलकर आज कसम यह खाएँ,
प्लास्टिक नहीं, पेपर अपनाएँ!
-बिजय बहादुर तिवारी
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