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                            जला कर हसरतें अपनी,
                                                                 
                            
नया इक दौर लाना है।

खामोशी की ओढ़कर चादर,
ज़माने को दिखाना है।

जो समझे थे कि ढल जाएंगे,
उन्हें ये बात बतला दो।

बुझे जो दीप तूफ़ानों में,
उन्हें फिर से जला दो।

अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीं हमने,
अभी तो पूरा खुला आसमान पाना है।

थके हैं पाँव पर हिम्मत नहीं हारी,
अभी तो ज़िद का वो तूफ़ान लाना है।
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एक घंटा पहले

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