ममता प्यार की मूर्ति हो तुम
क्रोध तनिक भी न आता
उर की बातों को भाँप जो लेती
संदेह अगर मन में आता
माँ तू ,कितना प्यारी
तुम सा कोई नही इस जग में
सारे जहान में देखा तो
निश्छल प्यार तुम्हारा ही पाता
माँ के प्यार में न कोई मोल
दिल से प्यार जो माँ का है
और प्यार सब झूठे है
सच्चा प्यार तो माँ का है।
~ भूपेन्द्र कुमार शर्मा
"दीपू' फैज़ाबाद
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