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हंसता, मुस्कुराता, गुनगुनाता

                
                                                         
                            जब कभी भी
                                                                 
                            
उदासी सताती है मुझे
हो जाता हूं
तब
उद्विग्न, बहुत खिन्न !

मन मेरा
तब देख लेता है आइना में
आसूंओं से
नहाया चेहरा अपना

दिल के सामने
खड़ी
मुस्कुराती
चहकती
याद आ जाती है उसकी--
वो सभी कसमें

और फ़िर लौट आता हूं
खुद में
अविरल अविराम
मैं भी
तरोताजा
हंसता, मुस्कुराता, गुनगुनाता...

- भास्करानन्द झा भास्कर
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एक घंटा पहले

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