सच में अर्जुन ठीक ही था,
भूल गया रिश्ता नाता।
सच से सभी विमुख हो गए,
तो क्या?वह संबंध निभाता।।
आये जब अधिकार की बात,
कोई नहीं देता है साथ।
खुद आगे बढ़ना पड़ता है।
संकट से लड़ना पड़ता है।।
उठो पार्थ! गांडीव उठाओ,
शांति शक्ति की दासी है।
शत्रु दमन करने पर ही,
सदियों की शांति आती है।।
-विशाल
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