मेरे जिंदगी के आधे चाँद की मोहब्बत की वो बात हो
मेरे सफ़र के सफरनामे का और जज़्बात के उस जज्बातनामे का,,
तेरी दहलीज पर छोड़ा जो मैंने निकाहनामा,,
उस निकाह की शुरुआत हो मेरे सफर के अब सफरनामे का,,
शुरू होता मेरे जिंदगी के कबूलियत का कोई कबूल नामा हो
जो अहद के उजाले के सितारे में बहता कोई अहदनामा का,,फितूर कोई ज़िंदगानी दिल में उतरता
बात जाहिर हो सैलाब में उतरता गुमनुमा
कोई सुराखनुमा सुराख का कोई हद हो
नजम सुरूप ग़ज़ल मोहरूप,,मोहरे आशीर्वाद शायरी
मुलायम मोहब्बत अभिलाषा क्रीमी रंग लव लेटर
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