आजादी की गूंज सुनो,तो दिल से दिल तक जाती है
शहीदों की कुर्बानी, तिरंगे में लहराती है l
गुलामी की जंजीरें तोड़ दीं,जूझे हैं अंगारों से ।
खून से लिखी तकदीर सींच दी,
खुद के ही बलिदानों से ।
गुलामी का अंधेर खत्म कर अद्भुत राह बना ली है ।
आजादी की गूंज सुनो,तो दिल से दिल तक जाती है ।
शहीदों की कुर्बानी, तिरंगे में लहराती है ।
भगत, आजाद और गांधी के पैगाम ।
बोस का नारा,वन्दे मातरम् का जयगान।
एकता के धागे से ही जुल्म की छाती बेधी है ।
आजादी की गूंज सुनो,तो दिल से दिल तक जाती है ।
शहीदों की कुर्बानी, तिरंगे में लहराती है।
सीमा पर वीर जवान और खेत में हाली और किसान ।
दोनों की मेहनत रंग लाती, तभी चमकता हिन्दुस्तान।
भाषा-धर्म अलग भले पर,देश को दिलमें,
धड़कन एक हमारी है ।
आजादी की गूंज सुनो,तो दिल से दिल तक जाती है ।
शहीदों की कुर्बानी, तिरंगे में लहराती है।
आओ प्रण लें इस चमन को मरके भी बचाएंगे।
आने वाली नई पीढ़ी को आजादी ही देकर जाएंगे।
अजीमुद्दीन,जिंदा रहे पहचान हमारी,
आज दुनिया भी गुण गाती है।
आजादी की गूंज सुनो,तो दिल से दिल तक जाती है।
शहीदों की कुर्बानी तिरंगे में,
सदा शान से लहराती है।
- अजीमुद्दीन सैफी
शारदा स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड साइंस
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग
शारदा यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा उ०प्र०
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