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जश्न-ए-आजादी

                
                                                         
                            दिल की रोशनी से दीप जलाएं ,
                                                                 
                            
अंधेरे आंगन में खुशियां लाएं,
आज दिवाली मनाएं।

शहर में भीड़ बहुत है,
भीड़ से निकलकर एक शमां जलाएं ,
आज दिवाली मनाएं।

न जाने तुफान कब दस्तक दे दे,
उससे पहले बुझे दिल में चिरागे-ए- रोशन जलाएं,
आज दिवाली मनाएं।

मेरे घर का चिराग सूरज-चांद से कम है क्या !
बिखेरता है रोशनी तो सारी दुनिया जगमग- जगमग करती है,
आज दिवाली मनाएं।

सभ्य समाज आज लोगों में उम्मीद की किरण दिखाए,
कभी - कभी एक चिंगारी भी रोशनी के लिए काफी है,
आज दिवाली मनाएं।

विकसित भारत होने के लिए देश का कोना- कोना रोशन हो जाए,
सारी दुनिया की आंखें हमारे रोशनी से चौंधियां जाए,
आज दिवाली मनाएं।

- अविनाश रंजन 
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4 घंटे पहले

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