बारिश का मौसम आया है।
और पपीहे है ने गाया है।।
उजड़े -उजड़े पेड़ खड़े थे,
अब पात-पात हरियाया है।
महल -अटारी बहुत खड़े हैं,
झुग्गी ने जूठन खाया है।
प्रलय बाढ़ का बढ़ता जाता,
कितनों ने जान गंँवाया है।
फसलें चूनर सी लहरातीं,
बादल पाहुन की माया है।
-अविनाश ब्यौहार
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