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माटी की पुकार

                
                                                         
                            मां माटी मुझे पुकार रही
                                                                 
                            
‎ इन तेज पवन के झोकों से वो
‎ भिजवा मुझको तार रही
‎ मां माटी मुझे पुकार रही
‎  बचपन जिसकी गोद में बीता
‎ होगी  तरुणाई की हार वही 
‎ मां माटी मुझे पुकार रही
‎  माटी तो माता होती है
‎   तुमने ये सिखलाया मां
‎ माटी से बढ़कर कोई न दूजा
‎  तुमने ये बतलाया मां
‎  भारत है देवों की भूमि
‎ है धर्म का मेरे  सार यही
‎ मां माटी मुझे पुकार रही
‎  पक्षी करके कलरव मां मुझे
‎ संदेशा दे जाते हैं
‎ भारत मां के आवाह्न को
‎ गाकर मुझे सुनाते हैं
‎ माता देखो बुलाती मुझको
‎ पुरवाई वो बयार रही
‎ मां माटी मुझे पुकार रही
‎ माटी के अहसान को मैं तो
‎ पूर्ण नहीं कर सकता  मां
‎ माटी को है आन पड़ी तो
‎धीर नहीं धर सकता मां
‎उस माटी की चिट्ठी लाई
‎ सावन की ये  फुहार नई 
‎ मां माटी मुझे पुकार रही
‎ मां माटी मुझे पुकार रही
-  अश्वनी
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11 महीने पहले

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