दीदार ए वक़्त ऐसा होगा जब झूमेगा संसार
हसीन पलों में फिर से मुस्कुराएगा परिवार।
तू कुछ ना कर बस थोड़ी दुआ कर
जो तेरे लिए खड़े हैं उनका शुक्र कर।।
कोरॉना मिट जाएगा थोड़ा सब्र कर!
गर निकले बाहर तो मास्क पहन
बस कुछ दिन कर ले तकलीफे सहन।
मत रह उदास ना कल की फ़िक्र कर
हर पल बस खुशियों का जिक्र कर।।
कोरॉना मिट जाएगा थोड़ा सब्र कर!
दोड़ेंगी फिर ट्रेनें होगी फिर वही दमक
झूमेगा हर शख्स बिखरेंगी फिर वही चमक।
बस तू थोड़ा अपना थोड़ा अपनों का ख़्याल कर
बेबसी में ही सही पर अत्त्फ़ाल की परवाह कर।।
कोरॉना मिट जाएगा थोड़ा सब्र कर!
वक़्त रहते ना समझ पाया था तू
प्रकृति को हर तरह से तड़पाया था तू।
जब सब कुछ किया है तूने तो पश्चाताप तो कर
रहूंगा कुछ वक़्त घर के अंदर ये प्रण तो कर।।
कोरॉना मिट जाएगा थोड़ा सब्र कर!
कुछ देर संभल जा जरा इस वक़्त के साथ
कुछ नियम अपना वरन् जा कमबख्त के हाथ।
भीतर आए तो फिर हाथो का स्नान कर
बाहर जाए तो मास्क का इस्तेमाल कर ।।
कोरॉना मिट जाएगा थोड़ा सब्र कर!
बचाव ही इलाज है तू समझ तो सही
हाथ ना मिला ना ही बाहर जा कहीं।
एक बार पुरा-संस्कृति पर गौर तो कर
एक बार हाथ जोड़कर अभिवादन तो कर।।
कोरॉना मिट जाएगा थोड़ा सब्र कर!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X