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मन की बात जब मन से हो

                
                                                         
                            मन की बात जब मन से हो
                                                                 
                            
तो मन की बात करनी चाहिए है
आये कोई नहीं इस मन में
कुछ इस तरह बात करनी चाहिए
मन की बात जब मन से हो
खुद से खुद की बात करनी चाहिए
मन की बात जब मन से हो
मन का सूनापन कभी ना हो
जग को जीते तो जीत लियो,
मन को ये मालूम ये कभी ना हो
हारे मन से कौन जीते अब
मन में यह सूना कभी ना हो
मन की बातें जब मन से हो
तन को मालूम कभी ना हो
मन की बात जब मन से हो
आखों को जब हम बंद करते हैं
मन से मन की हम बात तभी करते हैं
सूनते हम सब मन की बात,
मान तभी हम मन की करते हैं
मन की जब चिंता करतें हैं
मन को हम समझा देते हैं
तूम निराश कभी ना होना
मन से यही हम बात कहते हैं
मन की बात जब मन से हो
प्यार तभी हम मन से करते है
तुम सोच लिए कितना भी हमको
हम मन से मोल तभी करते हैं
जग सूना अब मन भी सूना
अभी भी हम बात मन की करते हैं!
-आशीष द्विवेदी
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एक घंटा पहले

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