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तय है बदलना, हर चीज़ बदलती है ज़माने में

                
                                                         
                            तय है बदलना, हर चीज़ बदलती है ज़माने में,
                                                                 
                            
कहाँ रहता है कोई एक-सा इस फ़साने में।

कभी मौसम बदलता है, कभी चेहरे बदलते हैं,
कहाँ कुछ भी ठहरता है यहाँ एक ही ठिकाने में।

जो कल तक साथ चलते थे, वही अब दूर बैठे हैं,
अजब दस्तूर देखा हमने रिश्ते निभाने में।

कभी अपना पराया है, कभी पराया अपना है,
बड़ा कुछ सीखना पड़ता है दिल को आज़माने में।

हवा बदली तो पेड़ों ने भी अपना रंग बदला है,
भला क्या दोष है उनका समय के साथ ढलने में।

जो पत्थर था, वो घिसकर रास्ते का हिस्सा बन बैठा,
बड़ी ताक़त है वक़्त की किसी को भी तराशने में।

न जाने कौन-सा चेहरा हमें कल अपना मिल जाए,
न जाने कौन खो जाए किसी को अपना बनाने में।

‘अशफ़ाक़’ इतना समझ लेना, यही दस्तूर-ए-दुनिया है,
तय है हर चीज़ का बदलना यहाँ वक़्त के आने में।
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2 घंटे पहले

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