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बात क्या करें

                
                                                         
                            गुज़र चुके दिनों की हम
                                                                 
                            
बात क्या करें।
माफ़ खुद को कर सके ना
तुम्हें माफ़ क्या करें।।
जो हो चुका है उस पर तो
यकीं नहीं हमें।
जो होने वाला है उस पर
तक़रार क्या करें।।
सितम वक्त ने किया है या
दिल ने किया मुझपर।
ग़म से भरे लम्हों से
मुलाक़ात क्या करें
ऐतबार क्या खोया जैसे
खो गया जहां।
मिलती नहीं तुमसे अब
ख़्यालात क्या करें।।
बेज़ारियां दिलों की इस
तरह बढ़ चलीं।
कटने लगी है आंखों में अब
रात क्या करें।।
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42 मिनट पहले

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