आज़ाद वही जो सदा उड़ाने भरते हैं
सोचा भी कभी वो ऐसा कैसे करते हैं
पंख नहीं हौसला नहीं,
केवल नील गगन उनका
विज्ञान उड़ाता है उनको
मस्ती राह दिखाती है
नेकी उन्हें बचाती है
करता है मार्गदर्शन पट उनका
जो विलग शून्य में अथक कोशिशें करते है
आज़ाद वही जो सदा उड़ाने भरते हैं
आशाओं का आसमान है
उम्मीदों का रस्सा यह
होड़ और जज्बे दुस्साहस
दिन जैसी है यहाँ अमावश
अंतरिक्ष अनुभव अभ्यास
जहाँ सफल मन के प्रयास
मारुत सुत सा अनुमान पैमाने करते है
आज़ाद वही जो सदा उड़ाने भरते हैं
आसमान ने दे दी अनुमति
चाहे उड़ाये मोटर चक्र
चाहे उड़ाये मोटर गाड़ी
अनुकूलन ला देता आकार
बंट जाए जो वह सामान है
जो बट न सके वह आसमान है
विज्ञान साथ जब अध्यात्म बने रहते हैं
सोचा भी कभी वो ऐसा कैसे करते हैं
आज़ाद वही जो सदा उड़ाने भरते हैं
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X