साथ हैं पर फ़ासले हैं दरमियाँ,
चीख़ती दिल में दबी ख़ामोशियाँ।
रात चुप है दिल धड़कता है मगर,
चांद पर छाई हुई हैं बदलियाँ।
नींद मुझको क्यूं भला आती नहीं,
शोर करती दिल के अंदर सिसकियाँ।
उसकी ख़ुशबू है हवाओं में बसी,
तू खुली रख दिल की अपने खिड़कियाँ।
देखने को ख़ुश नज़र आता हूं मैं,
दिल के अंदर चल रही हैं आंधियाँ।
याद आती गांव की गलियां मुझे,
एक छोटा सा था अपना आशियां।
फल तुझे ये दें न दें बूढ़े शजर,
छाँव देंगी कुछ तो इनकी डालियाँ।
मुफ़लिसों की कर मदद तू शौक़ से,
अच्छी लगती हैं ख़ुदा को नेकियाँ ।
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