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हमने तुम्हारे वास्ते क्या कुछ नहीं किया

                
                                                         
                            हमने तुम्हारे वास्ते क्या कुछ नहीं किया ,
                                                                 
                            
तुमने निगाह फेर के सब कुछ भुला दिया ।

मिलते नहीं विचार तो तकरार छोड़ दी,
चुप चाप हमने ज़ह्र भरा घूंट पी लिया।

करना अगर है इश्क़ तो फिर मौत से न डर ,
जो इश्क़ में हुआ न फ़ना ख़ाक वो जिया।

तुकबन्दियाँ मिलाने से हासिल है कुछ नहीं,
बनती नहीं ग़ज़ल जो मिलाया न क़ाफ़िया।

मेरी ग़ज़ल सुनी है सभी ने जो ध्यान से,
करता हूँ मैं सभी का तहे दिल से शुक्रिया।
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17 मिनट पहले

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