हमने तुम्हारे वास्ते क्या कुछ नहीं किया ,
तुमने निगाह फेर के सब कुछ भुला दिया ।
मिलते नहीं विचार तो तकरार छोड़ दी,
चुप चाप हमने ज़ह्र भरा घूंट पी लिया।
करना अगर है इश्क़ तो फिर मौत से न डर ,
जो इश्क़ में हुआ न फ़ना ख़ाक वो जिया।
तुकबन्दियाँ मिलाने से हासिल है कुछ नहीं,
बनती नहीं ग़ज़ल जो मिलाया न क़ाफ़िया।
मेरी ग़ज़ल सुनी है सभी ने जो ध्यान से,
करता हूँ मैं सभी का तहे दिल से शुक्रिया।
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