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कदम आगे बढ़ाते जा रहे हैं ।

                
                                                         
                            हमारे हक़ दबाते जा रहे हैं ,
                                                                 
                            
नए कानून लाते जा रहे हैं।

डरे ये लोग इतना जेन-ज़ी से,
तभी तो ज़ुल्म ढाते जा रहे हैं।

युवाओं का मनोबल तोड़ने के ,
तरीके आज़माते जा रहे हैं ।

हिरासत में इन्हें तुम लाख रक्खो,
हजारों और आते जा रहे हैं ।

जुनूँ है जंगे-आज़ादी के जैसा
शहीदी गीत गाते जा रहे हैं ।

लिए हाथों में लहराता तिरंगा ,
कदम आगे बढ़ाते जा रहे हैं ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
16 घंटे पहले

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