हमारे हक़ दबाते जा रहे हैं ,
नए कानून लाते जा रहे हैं।
डरे ये लोग इतना जेन-ज़ी से,
तभी तो ज़ुल्म ढाते जा रहे हैं।
युवाओं का मनोबल तोड़ने के ,
तरीके आज़माते जा रहे हैं ।
हिरासत में इन्हें तुम लाख रक्खो,
हजारों और आते जा रहे हैं ।
जुनूँ है जंगे-आज़ादी के जैसा
शहीदी गीत गाते जा रहे हैं ।
लिए हाथों में लहराता तिरंगा ,
कदम आगे बढ़ाते जा रहे हैं ।
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