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यह तो एक छलावा है

                
                                                         
                            यह तो एक छलावा है !
                                                                 
                            
©® अर्जुन प्रभात
आत्म प्रदर्शन बहुत बढ़ गया
पग पग आज दिखावा है।
" जो दिखता है वो बिकता है"
यह तो एक छलावा है।।

सहज भाव जीवन चलता है
सहज भाव चल रहा पवन
सहज भाव धरती चलती है
सहज भाव चल रहा गगन
सहज सत्य है इस जीवन का
बाकी सभी भुलावा है ।
"जो दिखता है वो बिकता है"
यह तो एक छलावा है ।।

सूर्य कहां कहता है- जग को
देता हूं मैं ताप प्रखर
आत्म प्रदर्शन कहां कर रहे
पवन सुमन सरिता निर्झर?
साधक मौन गुफा में बैठे
भीड़ जुटाता बाबा है ।
" जो दिखता है वो बिकता है"
यह तो एक छलावा है।।

सहज साधना अंतः की है
सूक्ष्मलोक का सहज सफर
जीवन की सच्ची उन्नति है
नहीं लोक में, लोकोत्तर
करो आत्म का अवलोकन फिर
क्या काशी ,क्या काबा है।
" जो दिखता है वो बिकता है"
यह तो एक छलावा है।।
 
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एक घंटा पहले

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