ताज महल से सुंदर
है मेरा अपना घर
टहलता हूं नित अपने छत पर
कोई भगाएगा नहीं मुझे डांट कर
कोई कहेगा नहीं " जाओ अपने घर।"
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X