स्वदेश छोड़ कर मैं कहीं जाऊंगा नहीं
प्यार की पृष्ठभूमि भारत!भूलाऊंगा नहीं
भारत भूमि मेरी मां! मैं तुम्हें छोड़कर जाऊंगा नहीं
सूखी रूखी रोटी भी खा कर जी लूंगा
सम्मान से पानी प्यार का पी लूंगा
मैं मर जाऊंगा नहीं
स्वदेश में बसता प्राण मेरा, मैं परदेश जाऊंगा नहीं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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