है एक जगह प्यारा
है नाम नरवारा
है आंखों का तारा
है यह बड़ा न्यारा
मिले रास्ते में बनघारा
बहे जहां अमृत धारा
गूंजे गीत एक प्यारा
है एक इंडियन बैंक सहारा
लोग घूमें मस्ती में
देखो,इस बस्ती में
है एक बाजार यहां प्यारा
है नाम नरवारा
जल,अन्न से भरपूर
मन से भरपूर
बसे यहां राजपूत
मिले यहां घी दूध
हुआ मैं अभिभूत
पाकर प्यार प्यारा
कहीं गाय चरती
कहीं चरती
भैंस, बकरी
है सड़क संकरी
पड़ता यह शिवहर में
है प्यार घर घर में
कहीं खीरा बिकता,कहीं कंकरी
है छोटी सी यह नगरी
यहां से दो किलोमीटर पर नरहा है
एक डीएवी विद्यालय वहां है
यहां मिले सस्ती सब्जी, तरकारी
है यह धरती बड़ी प्यारी
अप्रैल 2018 में हुआ मेरा यहां पदार्पण
साथ में था सेवा,संस्कार,साहस,समर्पण
बना यह जगह मेरा एक दर्पण।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X