आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सहज कुमार और नरवारा

                
                                                         
                            है एक जगह प्यारा
                                                                 
                            
है नाम नरवारा
है आंखों का तारा
है यह बड़ा न्यारा
मिले रास्ते में बनघारा
बहे जहां अमृत धारा
गूंजे गीत एक प्यारा
है एक इंडियन बैंक सहारा
लोग घूमें मस्ती में
देखो,इस बस्ती में
है एक बाजार यहां प्यारा
है नाम नरवारा
जल,अन्न से भरपूर
मन से भरपूर
बसे यहां राजपूत
मिले यहां घी दूध
हुआ मैं अभिभूत
पाकर प्यार प्यारा
कहीं गाय चरती
कहीं चरती
भैंस, बकरी
है सड़क संकरी
पड़ता यह शिवहर में
है प्यार घर घर में
कहीं खीरा बिकता,कहीं कंकरी
है छोटी सी यह नगरी
यहां से दो किलोमीटर पर नरहा है
एक डीएवी विद्यालय वहां है
यहां मिले सस्ती सब्जी, तरकारी
है यह धरती बड़ी प्यारी
अप्रैल 2018 में हुआ मेरा यहां पदार्पण
साथ में था सेवा,संस्कार,साहस,समर्पण
बना यह जगह मेरा एक दर्पण।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
37 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर