रजोगुण बढ़ रहा है
लोभ,अशांति बढ़ रहा है
कुछ भी साथ नहीं जाएगा
पता है,तन भी साथ नहीं जाएगा
नहीं साथ जग जाएगा
तो भी चाहिए घर, मैदान
चाहिए सारा जहान
चाहिए सारा समान
चाहिए आसमान
चाहिए इंसान
को सारा सम्मान
मुझे तो चाहिए बस आप भगवान!
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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