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रावण दहन

                
                                                         
                            असली रावण घूम रहा है बीच सड़क पर
                                                                 
                            
नकली रावण को जला रहे हैं हम चौक पर
देख रहा है मन मेरा चौंक कर
अरे! हत्यारों
घुसखोरों
रंगदारों
देशद्रोहियों को चुन चुन कर
जला दो बीच सड़क पर
कुछ तो आएगा डर
उनमें जो अपराध कर
जेल से फरार हो कर
घूम रहे हैं बीच सड़क पर
बेखौफ होकर
ये कर रहे हैं मर्डर
ये असली रावण हैं घर घर में
हमारे परिवार और शहर में
कोई भाई बन कर
कोई चाचा बन कर
कोई मंत्री, नेता बन कर
बच जाता है
समाज नरक बन जाता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
41 minutes ago

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