रास्ता कठिन है
रात या दिन है
रास्ते में पत्थर हैं
रास्ता कष्टकर है
पर लक्ष्य पर नजर है
तो किस बात का डर है?
जो चलता निरंतर है
वह पहुंचता लक्ष्य पर है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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