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ओ मेरे प्यारे गांव! प्रणाम

                
                                                         
                            ओ मेरे बाग के आम अमरूद के पेड़!
                                                                 
                            
तुम क्या जानो मैं कहां हूं,ओ प्यारे पेड़!
बचपन में मैं तेरी छाया में खेला,कूदा
जब से मैं पढ़ाई-लिखाई के लिए कूदा
मऊ, वाराणसी, गोरखपुर
और नौकरी के लिए मुजफ्फरपुर
तब से मैं दूर हुआ पर तेरी याद आई
तेरी तरूणाई, तेरे फलों की याद आई
गर्मी की छुट्टी में मैं आऊंगा
भर पेट तुमसे बतियाऊंगा
ओ मेरे प्यारे पेड़! प्रणाम
ओ मेरे प्यारे गांव! प्रणाम।
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37 मिनट पहले

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