मेरी गंगा मां!
ओ मां! तू आ
मेरे पापों को बहा
मेरे कुकर्मों को बहा
मेरी मां! तू आ
देश प्रेम के भाव,जगा
ओ मां! तू आ,तू आ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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