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मेरे हृदय में है हिंदुस्तान

                
                                                         
                            मेरे हृदय में है हिंदुस्तान
                                                                 
                            
मेरे सामने है तड़पता हिंदुस्तान
मेरे सामने है खेत खलिहान
मेरे सामने है गंगा का मैदान
मेरे सामने है खुला आसमान
मेरे सामने है भूखा हिंदुस्तान
बन कर कर्मठ इंसान
बन कर कर्मठ जवान
बन कर चरित्रवान
बन कर कर्मठ किसान
लिख कर क्रांति कारी रचना महान
चाह रहा हूं देखना विकसित हिंदुस्तान
बन कर, निडर इंसान
बन कर वीर हनुमान
बन कर वीर बलवान
चाह रहा हूं बदल दूं हिंदुस्तान
चाह रहा हूं बना दूं सबसे शक्तिशाली हिंदुस्तान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
 
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32 मिनट पहले

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