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मेरे अंदर की आग

                
                                                         
                            मेरे अंदर आग है
                                                                 
                            
मेरे अंदर त्याग है
चाहता हूं मैं वीरों का हमाज बनाऊं
चाहता हूं मैं एक सुंदर समाज बनाऊं
चाहता हूं मैं सबको सदा जिताऊं
चाहता हूं मैं एक आग देश प्रेम का लगाऊं
चाहता हूं मैं विश्व प्रेम की आग सुलगाऊं
धधक रही है ज्वाला, बोलो कैसे बुझाऊं?
अपने अंदर की आग से देशद्रोहियों को जलाऊं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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