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मुझे एक चमत्कारी पुरुष चाहिए।

                
                                                         
                            मैं मुजफ्फरपुर हूं
                                                                 
                            
मैं हिंद का कोहिनूर हूं
मैं लीची से भरपूर हूं
मैं प्यार से भरपूर हूं
मैं हूं जैसे पावन गंगा
मैं हूं भला चंगा
१९८४ को भूलूं तो हुआ नहीं दंगा
मैं हूं विकास में
पूरे बिहार में
द्वितीय स्थान पर
मुझे आना है प्रथम स्थान पर
मुझे एम्स चाहिए
मुझे बड़ा हवाई अड्डा चाहिए
मुझे बड़ा कारखाना चाहिए
मुझे बड़ा नेता चाहिए
मुझे युग प्रणेता चाहिए
मेरे पास बड़ा अंतराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन है
मुझे नहीं कोई टेन्सन है
मैं लीचीपूरम हूं
मैं मधुरम हूं
मैं सुंदरता से भरपूर हूं
मैं मुजफ्फरपुर हूं
मेरे खेत लहलहाते हैं
ताड़ के पत्ते फड़फड़ाते हैं
आम अमरूद बुलाते हैं
पेड़ शीष झुकाते हैं
मैं साहित्यिक शहर हूं
मैं सांस्कृतिक शहर हूं
मैं एतिहासिक शहर हूं
मैं खुदीराम बोस का शहर हूं
मैं दिनकर,राजेन्द्र का शहर हूं
मैं जे.बी. कृपलानी का शहर हूं
मैं मलकानी का शहर हूं
मैं जानकी जी का शहर हूं
मैं जार्ज फर्नांडीज का शहर हूं
मेरे पास सूतापट्टी है
जहां कपड़ों का भंडार है
जहां होता बड़ा व्यापार है
जहां एसिया भर का व्यापार है
मेरे पास मोती झील है
मैं व्यापारिक राजधानी हूं
मेरा इतिहास है अनुपम
मैं हूं अनुपम
मुझे एक विकास पुरूष चाहिए
मुझे एक चमत्कारी पुरुष चाहिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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51 मिनट पहले

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