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विजय अभियान कब रुका?

                
                                                         
                            शीष मेरा कब झुका?
                                                                 
                            
विजय अभियान कब रुका?
शंखनाद करता हूं
मैं हुंकार करता हूं
न झुकुंगा
न रुकूंगा
लड़ता रहूंगा शान से
आन बान से
जिऊंगा स्वाभिमान से
हूं मैं गंगा के मैदान से
हूं मैं हिंदुस्तान से
बागी बलिया का वासी हूं
बागी बैरिया का निवासी हूं
हां मैं भारत का वासी हूं
मेरा टोला
जोर से बोला
इन्कलाब जिंदाबाद
क्रांति स्वर जिंदा बाद
मेरा टोला
गुदरी सिंह के टोला।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
25 मिनट पहले

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