हो हर हाथ में तिरंगा
हो हर होंठ पे गंगा
हों हर हिंदुस्तानी तत्पर
स्वदेश सेवा हो सबसे ऊपर
दे दें हम प्राण स्वदेश पर
दिखे रंग रूप में अनेकता
पर हो हमारी सोच में एकता
ऐसा हमारा हिंदुस्तान हो
जहां स्वदेश प्रेम का निशान हो
वीरता,विकास में हमारा प्रथम स्थान हो
सदा सर्वत्र सच्चाई से हमारा पहचान हो
ऐसा हो देश मेरा
जहां ईश्वर करें फेरा
यही मेरा सपना है
सपना मेरा अपना है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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