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गांव की याद

                
                                                         
                            गांव मेरा मुझसे बतियाता है
                                                                 
                            
मेरे गांव का पीपल बतियाता है
मेरे गांव का बागिचा बतियाता है
गांव जब जा नहीं पाता मैं
गांव से जब बतिया नहीं पाता मैं
गांव मुझे बहुत बुलाता है
मन मेरा कुलबुलाता है
गांव जाने के लिए
गांव से बतियाने के लिए
दो पैसे के लिए
नौकरी के लिए
गांव छोड़ना पड़ा
शहर आना पड़ा
दुःख सहना पड़ा
गांव! तू बहुत याद आता है
गांव! तू मेरे दिल में समाता है
चितकबरी गैया
मेरी गंगा मैया
याद तेरी आती है
याद बहुत सताती है
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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