बहे मंद मंद पवन
मन मोहे उपवन
यह पावन पवन
यह औषधि अनमोल
लगाओ न इसका मोल
पैसे से मत इसे तोल
मिले भोरे भोर
चलो गांव की ओर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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