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गलतियों को करो स्वीकार

                
                                                         
                            गलतियां सबसे होती हैं
                                                                 
                            
गलतियां बचपन से शुरू होती हैं
गलतियां जवानी में होती हैं
गलतियां जिंदगानी में होती हैं
गलतियां बुढ़ापे में होती हैं
गलतियों को करो स्वीकार
नित अपने में करो सुधार
यदि है अपने जीवन से प्यार
नित निरंतर सीखने से बदलता है संसार
बड़ों के डांट फटकार
को समझो प्यार
और पाओ पुरस्कार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
42 minutes ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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