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गांव में स्वर्ग

                
                                                         
                            गांव मेरा बसा गंगा के किनारे
                                                                 
                            
बलिया जिले में बैरिया के किनारे
हैं लोग प्यारे प्यारे
हैं आंखों के ये तारे
खेत खलिहान हैं
आम के बागान हैं
अमरूद जामुन के पेड़ प्यारे प्यारे
पांडे पुर ढाला है
प्यार का प्याला है
यहीं मैं जन्म लिया
प्राथमिक शिक्षा लिया
स्नातक की डिग्री लिया
स्नातकोत्तर के लिए,गांव छोड़ा
पीपल का छांव छोड़ा
हूं मैं शहर में
पर है मन घर में
गांव है हृदय में
मां गंगा हैं हृदय में
गांव को मैं भूल सकता नहीं
गांव में खोया है स्वर्ग कहीं।
- सहज कुमार
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3 घंटे पहले

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