धन्य है भारत भूमि जहां ईश्वर तरसते हैं आने को
हमीं मूर्ख हैं छटपटाते रहते हैं दूर देश जाने को
कोई अमेरिका आस्ट्रेलिया ईरान जाता है
पूछिए उससे क्या कभी वह सम्मान पाता है?
नहीं मिलता सम्मान जिसका वह हकदार है
हां,क्षण भर के लिए बन जाता वह मालदार है
कोई जाता दुबई हाथ पैर कटवाने को
सारे खाड़ी वाले देश हैं तत्पर नाक काटने कटवाने को
तो भी हम रह कर परिवार से दूर
दो पैसे के लिए कायर बनते हम शूर
मन मेरा विदेश में जाकर तड़पता है
भारत मां के आंचल में छुपने का मन करता है
अमेरिका तो हाथों में हथकड़ी पैरों में पैकर
ठोक कर जानवरों जैसा वाहनों में कोच कर
हम हिन्दुस्तानियों को अपमानित कर
भेज देता है,हाय हाय रे मजबूरी!
परिवार से हजारों किलोमीटर की दूरी
पैसे के लोभ में हम कुछ समझ न पाए
हर वर्ष सैकड़ों मूर्ख भारतीय अमेरिका जाएं
उसको हम विकसित बनाएं
खुद अविकसित रह जाएं
हिंद से प्यार कहां है?
अटल कलाम कहां हैं?
आजाद कहां हैं?
भगतसिंह जवान कहां हैं?
पृथ्वीराज चौहान कहां हैं?
कायर कपूत कब हम बन गए?
मूर्खाधिराज कब हम बन गए?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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